Thursday, November 30, 2006

इन्तिहा

तुम पूछते हो मेरे प्यार की इन्तिहा क्या है,
चाह कर भी मैं कुछ कह नहीं पाता हूं ।
जब से तुम वो तस्वीर ले गये हो बन्द आँखों से,
खोल कर आँखें मैं रह नहीं पाता हूं ।
वो कहते हैं के तू कोई बन्धा तो है नहीं,
मै तो दरिया हूँ, फिर क्यूँ बह नहीं पाता हूँ ।
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