Sunday, January 11, 2009

आज रात मैं नींद से जागा...

कुछ भूल सा गया हूँ या .. अगर सही से याद हो किसी को या २००४ की 'सृजन' हो किसी के पास तो इसे सही करने में मदद करें

आज रात मैं नींद से जागा, भाग्य उदय कर उठा अभागा.
कल का दिन कुछ याद नहीं है, खोया-पाया ज्ञात नहीं है.
धड़कन दिल से दूर गयी थी, स्मृति मुझको भूल रही थी.
शरण मुझे रणभूमि ने दी थी, गोला उस गुल-आब ने दागा.
आज रात मैं नींद से जागा....

सपने मेरे टूट चुके थे, अपने मेरे रूठ चुके थे,
जीवन झूला झूल रहा था, अपने पथ को भूल रहा था,
अर्घ्य मेरा स्वीकार हुआ ना, ख़ुद पर भी अधिकार हुआ ना.
गाड़ी मेरी छूट रही थी, कोशिश कर पुरज़ोर मैं भागा.
आज रात मैं नींद से जागा....

गुलशन तपती रेत हो गए, पुष्प काल की भेंट हो गए,
चक्रवात ही चक्रवात थे, बांधे मुझको मोहपाश थे.
सब थे मिलकर नाच नचाते, नए नए थे खेल रचाते.
फ़िर टूटा कठपुतली धागा,आज रात मैं नींद से जागा...

जाग गया हूँ सोऊंगा न, प्राप्त किया खोऊंगा न ,
तरकश का निर्माण करूंगा, अब उसमे हर बाण रखूंगा,
हाँ मैंने हर आंसू त्यागा, आज रात मैं नींद से जागा.
....................... सुप्रेम त्रिवेदी "आबाद"
Post a Comment