Sunday, February 3, 2013

तुम प्रेम सी नौका मिली, मैं पार जीवन तट गया

तम रात थी, कुछ कट गयी
सुध भोर थी आकर गयी,
ये दिन बड़ा लाचार था,
कुछ राग था कुछ प्यार था,
तुम पास थे सब साथ था,
तुम दूर थे, एहसास था,
फिर सूर्य की पहली किरण,
घन मेघ सारा छट गया,
तुम प्रेम सी नौका मिली,
मैं पार जीवन तट गया

धूप ने व्याकुल किया,
इक हाथ ने संबल दिया,
नयन भीगे, रूप व्यापक,
आर्द्र मौसम, देखो जहाँ तक
फिर जोर की बारिश हुई,
सब क्षोभ ढिल कर घुल गया,
तुम प्रेम सी नौका मिली,
मैं पार जीवन तट गया






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