Saturday, May 5, 2007

रोते-रोते शाम सी हो जाती है

रोते-रोते शाम सी हो जाती है,
उम्र यूँ ही तमाम सी हो जाती है,
जब भी आना मेरे घर, तो रात में आना,
दिन में ये गलियाँ भी,
बदनाम सी हो जाती हैं।
...........Suprem Trivedi "barbaad"
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