Friday, November 1, 2013

Bahujan Lokpal Bill --

3 September 2011 at 22:52
 
और तो बुराई क्या है? न तो वे ट्विटर- फेसबुक प्रधान मध्य-वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं और न ही उनके लिए मीडिया पलके पांवड़े बिछाए १० दिन लगातार उनके हक की लड़ाई को कवरेज देगा. क्योंकि वे जिस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं उसके पास तो रात को चूल्हा जलाने का जुगाड़ नहीं होता लिविंग रूम में एल.सी.डी. क्या जलाएंगे? क्यों दे उन्हें मीडिया कवरेज ... धंधा करना है उन्हें
बताओ मेरे दोस्त वो लोगों को जा कर एक विधेयक के विभिन्न बिन्दुओं के बारे में समझाए की अपने भूखे बच्चों को समझाए की आज खाना क्यों नहीं मिलेगा?

इतिहास गवाह है कि 3G और वाई-फाई से कनेक्टेड डूड कभी न क्रांति लाये थे और न कभी लायेंगे अरे! वो रेलवे स्टेशन से अपने गाँव से आते माँ-बाप को नहीं ला पाएंगे मतलब टैक्सी करा देंगे और आप उम्मीद कर रहे हैं कि वो आंधी और क्रांति ले आयें...

कुछ लोगों का कहना है कि क्रांति हो चुकी है ... जनता सो रही थी अब जाग गयी है ... मेरे भाई पहले मुद्दा सो समझो ... जनता सो नहीं रही थी... जनता भूखी थी... और वो आज भी भूखी है ... सोवोगे तो दद्दू तुम तब जब पेट भरा होगा ... और जितनों का पेट भरा था वो भले सो रहे हों ... उनके जागने से भला नहीं होने का ... वो कल तुम्हारे साथ तुम्हारे आन्दोलन में देश बचा रहा था ... आज relationship बचा रहा है .. कल नयी गर्लफ्रैंड बना रहा होगा ... देखो तुम्हारा काम भी हो गया है ... फुटेज पा चुके हो ... अब इन भोले भाले डूड लोगों को जाने दो ... उन्हें बड़ी टेंशन है ... उन्हें पचपन EMI देनी होती हैं ... और फिर सबसे बड़ा मुद्दा तो उनके सामने ये है कि लड़की तो अल्टो से पटती नहीं बूट वाली गाड़ी हो कमजकम और २ बजे के बाद वो वाला पब बंद हो जाता है ...

एक बात और बता दूं -- जब तक कोई आन्दोलन स्थल के बहार एक भी पार्किंग स्पेस की डिमांड रहेगी ...तब तक क्रांति नहीं 'मोटर-कार' आयेगी. जब जनता फोटो-खिंचाने नहीं सिंघासन पलटने आती है तो जानेमन वो फटी-बिवाई नंगे पाँव आती है... और वो पाँव पार्किंग स्पेस नहीं मांगता ...

एक बड़े महान FOSLA ग्रुप के कवि हैं, वे भी अक्सर मंच से आन्दोलन करते दीखते थे ... कदाचित उनका आन्दोलन टीवी कैमरा है ...
कल किसी ने उनका एक वीडियो दिखाया --- वे कह रहे थे थू है ऐसी व्यवस्था पर जहाँ 'अभिनव बिंद्रा' 5 करोड़ पाता है एक निशाना लगा कर और वहीँ सेना में गोली खाने वाले को 5 लाख ... मैंने कहा भाई जब ये देश मंच पर हाथ भांति भांति से हाथ चला चला कर भोंडी भोंडी कविता पढने वालों को एक रात का २५ हज़ार दे रहा था तब तू क्यों नहीं बोला ...

ये समझ बैठे हैं चाहत मोहब्बत आंसू दिलबर दुल्हन से भोंडी तुकबंदी कर के इंजीनियरिंग कालेजों के बैकबेंचर्स की हा हा ही ही वाह वाह सुनकर ये रामधारी सिंह दिनकर बन जायेंगे ...

Post a Comment